About US

Our Mission

विश्व के सभी मनुष्य दुःख को दूर कर सुख को प्राप्त करना चाहते है, और दुःख का कारण अज्ञान है, सभी ज्ञान का मुख्य स्त्रोत्र वेद है. महृषि मनु ने "सर्व ज्ञानमयो हिस:" कह कर वेद को ही समस्त ज्ञान का मूल माना है, अन्यत्र भी "वेदोsखिलो धर्म मूलम" मनु स्मृति २-६ मैं वेद को धर्म का मूल उलेखित किया है, "धर्म जिज्ञासामाना: प्रमाण परम श्रुति: " अथार्थ जो धर्म का ज्ञान प्राप्त करना चाहते है उनके लिए परम प्रमाण वेद है. इसी प्रकार वेद ज्ञान पर आधारित ऋषि कृत ग्रन्थ उपनिषद , ब्राह्मण ग्रन्थ , दर्शन, मीमांसा अदि आर्ष ग्रन्थ कहलाते है,आर्ष ग्रंथो के ज्ञान को समझ कर मानव दुखो से छूट कर परम सुख मोक्ष को प्राप्त कर सकता है.
इन आर्ष ग्रंथो के सरलतम रूप मे प्रचार प्रसार एवं इससे सम्बंधित कार्य मैं कार्यरत ब्रम्ह्चारी, सन्यासी आर्य वीरो के सहयोग हेतु आर्ष न्यास का गठन दिनांक 16 अगस्त 2011 को स्वामी विश्वांग, आचार्य सत्यजीत, श्री सुभाष स्वामी , श्री आदित्य स्वामी एवं श्री रामगोपाल गर्ग के द्वारा अजमेर मैं किया गया. आर्ष न्यास आध्त्यमिक एवं व्यवाहरिक विषयों को जिज्ञासा समाधान , उपनिषद भाष्य, पुस्तक एवं कथा के माध्यम से प्रस्तुत करने मे अग्रणी है..

Our Vision

  • आर्ष पाठविधि के छात्रों को छात्रवृतियां प्रदान करना
  • आर्ष पाठविधि के अध्यापकों व् गुरुकुलों को आर्थिक व् अन्य सहयोग प्रदान करना
  • आर्य समाज, सनातन वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार में लगे वर्तमान व् पूर्व के वनप्रस्थियुो , ब्रमचरियों , भजनोपदेशकों ,प्रशिक्षिकों , आर्यवीरों व् कार्यकर्तायो को प्रचार प्रसार , जीवन व्यापन अवं चिकित्सा हेतु यथायोग्य सहयोग प्रदान करना
  • धारणा-ध्यान-समाधि (अन्तरंग योग) में साधकों का प्रोत्साहन करना/प्रेरणा करना ।
  • आर्ष-गन्थों/भाष्यों का प्रकाशन एवं प्रचार करना एवं वैदिक सिद्धांतो से सम्बंदित ज्ञान सामग्री को सरल भाषा में आधुनिक प्रचार माध्यम (इंटरनेट ,विचार टीवी ) अदि पर उपलब्द करना